भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 में संविधान संशोधन प्रक्रिया का उल्लेख मिलता है।संविधान संशोधन केवल संसद के द्वारा ही किया जा सकता है ।सबसे पहला सविधान संशोधन 1951 में किया गया था।इसमें नोवी अनुसूची को शामिल किया गया ताकि भूमि सुधार कानून को चुनौती न दी जा सके।



 21 वा सविधान संशोधन: 21 वा सविधान संशोधन 1967 में किया गया जिसके माध्यम से सिंधी भाषा को जोड़ा गया ।जिसके कारण भाषाओं कि संख्या 15 हो गई।


42 वा सविधान संशोधन: ये सविधान संशोधन 1976 में किया गया ।इस संविधान संशोधन को मिनी सविधान के नाम से भी जाना जाता है ।इस संशोधन के द्वारा सविधान की प्रस्तावना में एकता, अखंडता ,धर्मनिरपेक्षता और समाजवादी जेसे शब्दों को जोड़ा गया ।

इस सविधान संशोधन के द्वारा ये भी सुनिश्चित किया गया कि विशेष परिस्थितियों में नीति निर्देशक सिद्धांतो को मूल अधिकारों से अधिक महत्व देने की बात कही है।


44 वा सविधान संशोधन: इस सविधान संशोधन  में मौलिक अधिकारों की संख्या को 7 से 6 कर दिया गया इसके माध्यम से संपत्ति के अधिकार को हटा दिया गया और इसे कानूनी अधिकार की श्रेणी में रखा गया ।


52 वा सविधान संशोधन: राजनीतिक दल बदल पर रोक इस कानून को लाया गया और इसे सविधान की 10 वी अनुसूची में रखा गया ।


61 वा सविधान संशोधन: इस संशोधन में मतदान करने की उम्र को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया ये सविधान संशोधन 1989 में किया गया 


69 वा सविधान संशोधन: इसके माध्यम से केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली को विशेष दर्जा दिया गया और इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कर दिया गया ।इस सविधान संशोधन के माध्यम से दिल्ली में विधान सभा और मंत्री परिषद की व्यवस्था की गई।


71 वा सविधान संशोधन: 71 वा सविधान संशोधन 1992 में किया गया जिसके माध्यम से तीन भाषाएं जोड़ी गई कोकड़ी,नेपाली,ओर मणिपुरी जिसके कारण भाषाओं की संख्या बढ़कर 18 हो गई


73 वा सविधान संशोधन: इस सविधान संशोधन में अनुसूची 10 को जोड़ा गया जिसमें पंचायती राज्य संबंधी विषय दिए है।इस संशोधन के माध्यम से पंचायती राज्य में 29 विषय शामिल हैं


74 वा सविधान संशोधन: इस सविधान संशोधन में शहरी स्थानीय पंचायत जेसे नगर निगम ,नगर पालिका ओर नगर परिषद से संबंधित प्रावधान जोड़े गए।इसे सविधान की 12 अनुसूची में शामिल किया गया।इसमें 18 विषय शामिल है।


91 वा सविधान संशोधन: इस सविधान संशोधन के माध्यम से केंद्र और राज्य में मंत्री परिषद के सदस्य की संख्या कितनी हो सकती है ये बताया है ।लोकसभा  तथा विधानसभा  के सदस्य संख्या का 15 % हो सकती है।


92 वा सविधान संशोधन: 92 वा सविधान संशोधन 2003 में किया गया जिसमें तीन भाषाओं को जोड़ा गया डोंगरी,मैथिली ओर संथाली ।इस संशोधन के बाद भाषाओं कि संख्या 22 हो गई।


101 वा सविधान संशोधन: इसके माध्यम से  GST  को जोड़ा गया।