इसके बाद अन्य युरोपियन कंपनी आयी लेकिन इन सब में सबसे ताकतवर अंग्रेज थे। इन सभी की मकशद व्यापार करना था लेकिन यहाँ आने के पश्चात् उनकी महत्वकांक्षाये बढ़ती गयी और उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर अपना अधिकार जमा
औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुग़ल साम्रज्य की नीव कमजोर पड गयी जिसका फायदा उठाकर अलीवर्दी खा नामक व्यक्ति ने 1740 में बंगाल को मुग़ल साम्राज्य से मुक्त घोषित कर दिया और खुद को वहां का नवाब घोषित किया। उसी समय अंग्रेजो ने भी अपनी गतिविधियों को बड़ा दिया और अपना साम्राज्य को बढ़ाने लग गए क्युकी मुगलों के जाते ही साम्राज्य कमजोर होता गया। मुगल साम्राज्य की शक्ति क्षीन होते ही अंग्रेजो ने किला बंदी शुरू कर दी और अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया।
09 अप्रैल 1756 को अलिवर्दी खा की मृत्यु हो गई उसके बाद उसकी से गद्दी पर उसकी सबसे छोटी बेटी का पुत्र सिराजुद्दौला बैठा।उस समय बंगाल का माहौल बड़ा ही खतरनाक था क्युकी उस समय अंग्रेजो और फ्रांसीसियों में काफी संघर्ष हो रहे थे।ये दोनों ही अपनी विरासत को बढ़ाने के लिए क़िलाबन्दी करने लगे और अपना आधिपत्य बढ़ाने लगे।लेकिन सिराजुद्दौला को ऐसा इनका करना अच्छा नहीं लगा उसने तुरंत नवाब होने कारण दोनों को आदेश दिया कि दोनों किलेबंदी को रोक दे ।फ्रांसीसियों ने नवाब की बातो को मानते हुए क़िलाबन्दी को रोक दिया लेकिन अंग्रेजो ने किलेबंदी को नहीं रोका।इससे गुस्सा होकर सिराजुद्दौला ने 1756 में कासिम बाजार स्थित कोठी पर आक्रमण कर दिया और वह अपना कब्जा कर लिया।
उसके पश्चात हुगली नदी के किनारे बसे फोर्ट विलियमसं में भी कब्जा करके अंग्रेजो को बुरी तरह भागने के लिए मजबूत कर दिया ।फोर्ट विलयामसं पर कब्जा करते समय 146 अंग्रेज बंदी बनाए गए इसमें बड़े बच्चे सभी थे।सिराजुद्दौला ने इन्हे एक कोठरी में बंद कर दिया जब सुबह कोठरी खोली गई तो उनमें से सिर्फ 26 लोग ही जिंदा बच पाए।बचे हुए अंग्रेजो में से एक व्यक्ति ने ये सूचना अंग्रेजो तक पहुंचाई ।इसके बाद अंग्रेजो और सिराजुद्दौला के बीच और कड़वाहट हो गई ।कमरे में बंद करके मारने वाली घटना को इतिहास में ब्लैक होल की घटना या काल कोठरी की घटना के नाम से भी जाना जाता है।
अंग्रेजो को काल कोठारी की घटना सुनने के बाद वो बहुत गुस्सा हो गए उन्होंने मद्रास से सेना बुला कर लॉर्ड कलाइव के नेतृत्व में सिराजुद्दौला पर आक्रमण किया और कलकत्ता पर अपना अधिकार जमा लिया ।सिराजुद्दौला को संधि करने के लिए मजबूर कर दिया।इस संधि में अंग्रेजो को क़िला करने के लिए अनुमति मिल गई।इस संधि को अली नगर की संधि के नाम से जाना जाता है।इस संधि के बाद अंग्रेजो का आतंक और बड गया वे रुके नहीं उनका फ्रांसीियों के खिलाफ भी युद्ध स्टार्ट हो गया और फ्रांसीसियों के अधिकार क्षेत्र चंद्रनगर पर भी अपना अधिकार स्थापित कर लिया।
सिराजुद्दौला ने उसका बदला लेना के लिए युद्ध के लिए तैयारी शुरू की ।वहीं अंग्रेजो ने भी सिराजुद्दौला के सेनापति मिर जाफर को लालच देके उसे सिराजुद्दौला के खिलाफ करने की कोशिश की,और वो इस योजना में सफल हुए।अंग्रेजो ने सिराजुद्दौला के सेनापति मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाने का वादा किया इसके बदले उसे अंग्रेजो का साथ देना था।मीर जाफर ने विश्वास घात करने को तेयार हो गया।
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| प्लासी का युद्ध |
इसके बाद 23 जून 1757 को प्लासी नामक स्थल पर अंग्रेजो और सिराजुद्दौला के बीच युद्ध हुआ ।लेकिन सिराजुद्दौला के सेनापति मीर जाफर के विश्वासघात के कारण नवाब की सेना की हार हुई,इसके बाद सिराजुद्दौला को बंदी बना कर मृत्युदंड सहित गोली मार दी गई।इस युद्ध में अंग्रेजो की कमान क्लाइव और नवाब के सेना की कमान मीर जाफर ने संभाली।
वादे के फलस्वरूप मीर जाफर को बंगाल का नवाब bana दिया गया ।

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