सविधान के महत्वपूर्ण सविधान संशोधन :

constitutional amendment 


भारत के सविधान में 395 अनुच्छेद है और 12 अनुसूचिया है। इन सभी से मिलकर हमारे सविधान का निर्माण हुआ है ,ये अन्य देशो के सविधान से मिलकर बना है। भारत का सविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित सविधान है। .इसका निर्माण बाबा साहेब आंबेडकर ने किया था। लेकिन इसको अपने सूंदर सुलेख अख्सरो में हाथ से लिखा था प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने ऐसे सूंदर बहती इटालिक शैली में लिखा था। आज हम ऐसी सविधान के कुछ महत्वपूर्ण सविधान संशोधन  को समझेंगे जो एग्जाम की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण होते है। भारत के सविधान में अनुच्छेद 368 में सविधान संशोधन प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। 

सबसे पहले सविधान संशोधन 1951 में किया गया था इस सविधान संशोधन में नोवी अनुसूचि को जोड़ा गया ताकि भूमि सुधार कानूनों को चुनौती ना दी जा सके। पहले कोई व्यक्ति अपना मूल अधिकार बता कर इससे चुनौती दे सकता था और सरकार को  विकाश  के काम में काफी दिक्कत होती थी  संशोधन के बाद भूमि सुधर कानूनों को चुनौती  दी जा सकती है।

सविधान संसोधन संसद  द्वारा ही किया जा सकता है। 
21 वा  सविधान संशोधन 1967  को किया गया था जिसमें सिंधी भाषा को जोड़ा गया था ,इसके जुड़ने के बाद कुल भाषा की संख्या 15 हो गयी थी। 
71 वा सविधान संशोधन 1992 में किया गया था इसमें तीन भाषाओ  को जोड़ा गया जिसमे कोकड़ी ,नेपाली, मणिपुरी थी  इसके बाद कुल भाषा  की संख्या 18 हो गयी थी। 

92 व सविधान संशोधन 2003 में किया गया इसमें 4 भाषाओ को जोड़ा गया जिससे कुल 22 भाषा हो गयी। वर्तमान में कुल 22 भासाओ को प्रदर्शित भासाओ के रूप में मान्यता प्रदान की गयी है। 

61 वा सविधान संशोधन  के मताधिकार से सम्बन्धी बाते बताई गयी है , मतदान के लिए आयु की  21  वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गयी। 

42 वा सविधान संशोधन  1976 में किया गया था ,इसको मिनी सविधान के नाम से भी जाना जाता है। इसमें सविधान के एकता ,अखंडता ,धर्म निरपेक्षता और समाजवादी जैसे सब्दो को जोड़ा गया। इसमें मूल कर्तव्य को अनुछेद 51 (क़) को जोड़ा गया।इस संशोधन के तहत ये भी है की किसी विशेष परिष्तिथियो में ,निति निर्देशक सिंद्धान्तो को मूल अधिकारों से अधिक महत्व देने का प्रावधान सुनिश्चित किया गया। 

52  वा सविधान संशोधन के तहत राजनीती में दल बदल पर रोक के लिए और इस संशोधन को सविधान की अनुसूची 10 में रखा गया। इस कानून में दलबदल सम्बन्धी बदलाव किये गए। 

44 वा सविधान संसोधन के अनुसार मौलिक अधिकारों की संख्या को 7 से घटा कर 6 कर दिया गया। पहले हमारे पास संपत्ति से सम्बन्धी अधिकार भी था जिससे हम हमारी संपत्ति को बिना अपनी अनुमति के किसी को भी नहीं देते। इससे गवर्नमेंट प्रोजेक्ट के काफी परेशानी होती थी और देश का  विकास करने में काफी दिक्कत आती थी। लेकिन इस संसोधन के तहत ये अधिकार समाप्त कर दिया गया। अब सरकार किसी से भी संपत्ति ले सकती है उसके बदले आपको  पैसा मिल जाता है। 
अब संपत्ति के अधिकार को ख़त्म करके ऐसे क़ानूनी अधिकार की श्रेणी में रखा गया है और ये एक अब विविध अधिकार बन गया है। 

101 वा सविधान संसोधन के तहत जी स टी को रखा गया है इसमें हमें जी स टी से रिलेटेड सभी बाते  बतायी गयी है। 

73 वा सविधान संसोधन के तहत पंचायती राज को जोड़ा गया है और   ये हमारे सविधान की अनुसूची 11 में जोड़ा गया है। इसमें ग्रामीण सम्बन्धी चीजे है। 

74 वा सविधान संसोधन के तहत नगरीय पंचायत होती है ये हमारे सविधान की अनुसूची 12  में जोड़ी गयी है। इसमें नगर निगम,नगर पंचायत ,नगर परिषद् होती है। 

97 वा सविधान संसोधन के तहत हमें ये बताया गया है की हम किसी सोसाइटी का घट्न कर सकते है इस संसोधन में उसके वर्किंग और उसके गठन से सम्बन्धी बाते है। इसमें को ऑपरेटिव सोसियएटी को जोड़ा गया। 

91 वा सविधान संसोधन के तहत बताया गया की केंद्र और राज्य के मंत्री परिषद् की संख्या कितनी हो सकती है। इसमें सभी बाते है जो मंत्रियो की संख्या से सम्बन्धी है कितने को ले सकते है किस समुदाय से होगा। 

69 वा सविधान संसोधन के तहत दिल्ली को विषेस दर्जा मिला और उसे भारत की राजधानी दिल्ली कर दिया गया ,इस संसोधन के तहत दिल्ली में विधान सभा और विधान परिषद की व्यवस्था की गयी। 

10 वा सविधान संसोधन के तहत दादर और नगर हवेली को भारतीय संघ में जोड़ा गया। 

35 वा  संसोधन के तहत सिक्किम  संरक्षित राज्य के दर्जे को समाप्त करके  उसे भारतीय संघ में एक सह राज्य का दर्जा दिया गया। ऐसे 10 वी अनुसूची को जोड़ा गया उसमे सिक्किम को भारतीय संघ में शामिल किया गया। 

36  वा सविधान संसोधन के तहत सिक्किम को भारतीय संघ का पूर्ण राज्य का दर्जा दिया और 10 अनुसूची को समाप्त कर दिया गया।