एंग्लो मैसूर युद्ध 

आंग्ल मैसूर युद्ध अंग्रेजो और मैसूर के संस्थापक हैदर अली और उसके पुत्र के द्वारा लड़ा गया युद्ध है ,और इन युद्धों को एंग्लो मैसूर युद्ध के नाम से भी जाना जाता है।  इसमें प्रमुख चार युद्ध लड़े गए। 
स्वतंत्र मैसूर राज्य की स्थापना हैदर  अली ने 1761 में की थी। हैदर अली ने अपना शस्त्रागार या तोपखाना  को डिंडीगुल में स्थापित किया था। हैदर अली के बेटे का नाम टीपू सुल्तान था। अंग्रेजो के मध्य हैदर अली के युद्ध का कारण था की इन दोनों की रूचि साम्रज्य के विस्तार में थी।हैदर अली अपनी नौसेना तैयार कर रहा था ताकि समुद्रो के पास भी उसका कब्ज़ा या साम्रज्य रहे लेकिन अग्रेजो को उसका शक्तिशाली बनना मंजूर नहीं था। इसके अलावा हैदर अली के फ़्रांसिसीयो से बहुत अच्छे रिश्ते थे और ये फ़्रांसिसी अंग्रेजो के बहुत बड़े दुशमन थे इस कारण भी  अंग्रेजो का हैदर  अली से दुश्मनी का कारण था। 
आंग्ला मैसूर युद्ध में चार युद्ध लडे  गए अंतिम विजय अंग्रेजो की ी हुई ये युद्ध इस प्रकार है हम इन्हे एक एक करके समझते है 

आंगल मैसूर युद्ध (1767 -1799 )

प्रथम आंगला मैसूर युद्ध (1767 -1769 ):

ये युद्ध हैदर अली और कंपनी के बिच लड़ा गया। इस युद्ध में अंग्रेजो के साथ मराठा और हैदराबाद का निज़ाम थे और इन्होने अंग्रेजो का साथ देकर मैसूर पर हमला कर दिया। इस समय कंपनी का गवर्नर जोशेफ स्मिथ ने किया था। लेकिन कंपनी को ये युद्ध उल्टा पड गया क्युकी हैदर अली ने अपनी कूटनीति व् चतुराई से मराठा और हैदराबाद के निज़ाम को अपनी तरफ कर लिया ,ऐसा करने से अंग्रेजो को काफी नुकसान हुआ ,इन सभी ने मिलकर मद्रास को घेर लिया इस कारण अंग्रेज  इस युद्ध में हार  गए। जिससे भयभीत होकर अंग्रेज ने  1769  में मद्रास की संधि की और ये युद्ध मद्रास की संधि के तहत समाप्त किया गया।

द्वितीय आंग्ला मैसूर युद्ध (1780 -1784 ): 

 प्रथम युद्ध मद्रास की संधि के तहत समाप्त किया गया। इसके बाद 1782 में हैदर अली की मृत्यु हो गयी। प्रथम युद्ध की संधि के बाद भी ये युद्ध समाप्त नहीं हुआ। हैदर अली की मृत्यु के बाद उसके पुत्र टीपू सुल्तान इस युद्ध  को लड़ते है। इस युद्ध के समय बंगाल का गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग था। ये युद्ध मंगलोर की संधि के तहत समाप्त हुआ। 

तृतीय आंग्ला मैसूर युद्ध : 

ये युद्ध (1790 -1792 )के बिच लड़ा गया। इस युद्ध के समय गवर्नर जनरल कार्नवालिस था। अंग्रेजो ने संधि होने के बाद कुछ समय युद्ध बंद होता था लेकिन अंग्रेजो को तो साम्राज्य विस्तार करना  इसलिए अंग्रेजो ने फिर युद्ध करना प्रारम्भ कर दिया और टीपू सुल्तान के कुछ राज्यों को घेर लिया और रंगपट्टनम को भी घेर लिया। रंगपत्तनम टीपू सुल्तान की राजधानी थी। टीपू सुल्तान ये युद्ध लड़ता रहा लेकिन अंत में रंगपत्तनम की संधि (1792 ) के तहत ये युद्ध समाप्त हुआ। इस संधि के तहत टीपू सुल्तान को अपना आधा राज्य हर्जाने के तहत देने पड़े और उसे 3 करोड़ रूपए युद्ध की हानि के रूप  में देने पड़े। 

चतुर्थ आंगल मैसूर युद्ध(1799 ):

टीपू सुल्तान अपनी हार को स्वीकार न किया वो अंग्रेजो से बदला लेने के मोके ढूंढ़ने लगा। इसलिए उसने फ़्रांसिसीयो से संपर्क स्थापित किये और अपनी सेना में फ्रांस के सेनिको को भर्ती करने लगा। इस समय का अंगेजो का गवर्नर जनरल वेलेजली था। इसने टीपू सुल्तान की इस निति को भाप लिया। 
टीपू सुल्तान में मराठा और हैदरबाद के निज़ाम के साथ मिलकर अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध करने की योजना तैयार की। वेलेजली ने सहायक संधि का प्रस्ताव भ्रेजा लेकिन टीपू सुल्तान ने इसे अस्वीकार कर दिया ,यही चतुर्थ युद्ध का कारण बना। ये युद्ध 1799 में लड़ा गया और इस युद्ध में अंग्रेज की जित हुयी। यही अंगला मैसूर युद्ध समाप्त हो गया।